बेगूसराय, 22 फरवरी 2026। नेशनल पॉजिटिव न्यूज़
जनवादी लेखक संघ की जिला इकाई, बेगूसराय द्वारा संगठन के 45वें स्थापना दिवस के अवसर पर सेमिनार एवं कवि सम्मेलन-मुशायरे का आयोजन स्थानीय बिहार राज्य अराजपत्रित कर्मचारी महासंघ जिला कार्यालय में किया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता जलेसं बेगूसराय के संस्थापक अध्यक्ष जनकवि दीनानाथ सुमित्र ने की, जबकि संचालन डॉ. चन्द्रशेखर चौरसिया ने किया।
‘जनवादी लेखक संघ की विकास-यात्रा’ विषय पर हुआ सेमिनार: कार्यक्रम के प्रथम सत्र में ‘जनवादी लेखक संघ की विकास-यात्रा’ विषयक सेमिनार का उद्घाटन राज्य सचिव कुमार विनीताभ ने किया। अपने उद्घाटन वक्तव्य में उन्होंने कहा कि जनवादी लेखक संघ हिन्दी और उर्दू लेखकों का साझा संगठन है, जिसकी स्थापना घोषित आपातकाल के विरोध में सृजनशील साहित्यकारों के सामूहिक प्रयासों का परिणाम है।उन्होंने वर्तमान सामाजिक-राजनीतिक परिस्थितियों पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि देश में लोकतांत्रिक मूल्यों और सामाजिक सद्भाव की रक्षा के लिए जनवादी लेखकों की व्यापक एकता समय की आवश्यकता है। उन्होंने साहित्यकारों से जनपक्षधर रचनात्मक हस्तक्षेप को मजबूत करने का आह्वान किया।

स्थापना इतिहास और साहित्यिक विरासत पर चर्चा: स्थानीय जी.डी. कॉलेज के हिन्दी विभागाध्यक्ष डॉ० अभिषेक कुंदन ने जानकारी दी कि संगठन की स्थापना 14 फरवरी 1982 को दिल्ली में हुई थी। तब से यह संगठन लोकतंत्र और जनवादी मूल्यों की रक्षा के लिए निरंतर सक्रिय भूमिका निभा रहा है। पूर्व जिला सचिव साहित्यकार कला कौशल ने अपने संस्मरणात्मक वक्तव्य में संगठन के संस्थापक महासचिव डॉ. चन्द्र बली सिंह, राष्ट्रीय अध्यक्ष भैरव प्रसाद गुप्त, प्रो. मुरली मनोहर प्रसाद सिंह, डॉ. दूधनाथ सिंह और बिहार के संस्थापक सचिव डॉ. चन्द्र भूषण तिवारी से जुड़े आलेखों का पाठ किया।
कवि सम्मेलन और मुशायरे में गूंजी रचनात्मक अभिव्यक्ति: कार्यक्रम के दूसरे सत्र में आयोजित कवि सम्मेलन और मुशायरे में प्रभा कुमारी, रंजू ज्योति, डॉ. शगुफ्ता ताजवर, डॉ. कृष्ण सोनी, मो. सुबेर आलम, मुकेश कुमार, एस. एन. आजाद, प्रवीण प्रियदर्शी, संजीव फिरोज, देवेंद्र कुंवर, फुलेना रजक, सुन्दरम्, दीपक कुमार, अजीत झा ‘संजीत’ और संतोष अनुराग सहित कई कवियों और शायरों ने अपनी रचनाओं का सस्वर पाठ किया। कार्यक्रम के अंत में महासंघ के जिला सचिव मोहन मुरारी ने धन्यवाद ज्ञापित किया। इस अवसर पर सूर्य नारायण रजक, रमेश प्रसाद सिंह, मो. मजहर, मथुरा ठाकुर, रंजीत कुमार, शंकर मोची और रामदास ठाकुर सहित अनेक साहित्यप्रेमी उपस्थित रहे।








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