🇧🇩 ढाका | 13 फ़रवरी 2026। नेशनल पॉजिटिव न्यूज़ डेस्क
बांग्लादेश की राजनीति में बड़ा बदलाव लाते हुए तारीक रहमान अब देश के अगले प्रधानमंत्री बनने की ओर बढ़ रहे हैं। हालिया आम चुनाव में उनकी पार्टी Bangladesh Nationalist Party (BNP) को स्पष्ट बहुमत मिला है, जिसके बाद उनकी नेतृत्व क्षमता और राजनीतिक यात्रा चर्चा के केंद्र में है।
👨👩👦 राजनीतिक परिवार से जुड़ाव: तारिक रहमान का जन्म 1960 के दशक में एक प्रभावशाली राजनीतिक परिवार में हुआ। उनके पिता ज़िआउर रहमान बांग्लादेश के राष्ट्रपति रहे। उनकी माता खलीदा ज़िआ तीन बार देश की प्रधानमंत्री रह चुकी हैं।यही कारण है कि राजनीति से उनका जुड़ाव बचपन से ही रहा। हालांकि सक्रिय राजनीति में उन्होंने 1990 के दशक में औपचारिक रूप से कदम रखा।
🏛️ BNP में उभार और संगठनात्मक पकड़: तारिक रहमान ने BNP के संगठनात्मक ढांचे को मजबूत करने में अहम भूमिका निभाई। वे पार्टी के वरिष्ठ उपाध्यक्ष और बाद में कार्यवाहक अध्यक्ष बने। विशेषज्ञों के अनुसार, उन्होंने युवा कार्यकर्ताओं और जमीनी स्तर के नेताओं को जोड़ने की रणनीति अपनाई, जिससे पार्टी को व्यापक समर्थन मिला। 2026 के आम चुनाव में उनकी रणनीतिक भूमिका निर्णायक मानी जा रही है।
⚖️ विवाद और निर्वासन का दौर: राजनीतिक जीवन के दौरान तारिक रहमान कई विवादों में भी घिरे। 2007-08 के राजनीतिक संकट के बाद उन पर भ्रष्टाचार और अन्य मामलों में आरोप लगे। इसके बाद वे इलाज के लिए विदेश गए और लगभग 17 वर्षों तक लंदन में निर्वासन में रहे। इस दौरान भी उन्होंने डिजिटल माध्यमों से पार्टी का नेतृत्व जारी रखा। हाल के वर्षों में उनके खिलाफ कई मामलों में राहत मिली, जिससे उनकी सक्रिय राजनीति में वापसी का रास्ता साफ हुआ।
🗳️ दो सीटों से जीत: हालिया चुनाव में तारिक रहमान ने दो सीटों — ढाका-17 और बोगुरा-6 — से चुनाव लड़ा और दोनों जगह जीत दर्ज की। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह जीत उनके जनाधार और पार्टी पर मजबूत पकड़ का संकेत है।
📜 राजनीतिक दृष्टिकोण और एजेंडा: तारिक रहमान ने चुनाव अभियान के दौरान शासन सुधार, आर्थिक पुनर्निर्माण और लोकतांत्रिक संस्थाओं की मजबूती पर जोर दिया। उनकी पार्टी BNP ने:प्रशासनिक सुधार, न्यायपालिका की स्वतंत्रता, युवाओं के लिए रोजगार, विदेशी निवेश को बढ़ावा और स्थानीय प्रशासन को सशक्त बनाने जैसे वादे किए हैं। उन्होंने “Friend yes, Master no” नीति के तहत संतुलित विदेश नीति की भी बात कही है।
👨💼 35 साल बाद पुरुष प्रधानमंत्री: यदि वे प्रधानमंत्री पद की शपथ लेते हैं तो 35 साल बाद बांग्लादेश में कोई पुरुष प्रधानमंत्री बनेगा।1988 में काज़ी ज़फर अहमद प्रधानमंत्री बने थे। इसके बाद देश की राजनीति में शेख हसीना और खालिदा जिया का वर्चस्व रहा।
🌍 अंतरराष्ट्रीय नजर: तारिक रहमान की जीत पर क्षेत्रीय और वैश्विक स्तर पर प्रतिक्रियाएँ आ रही हैं। राजनीतिक विश्लेषक मानते हैं कि उनके नेतृत्व में बांग्लादेश की विदेश नीति और क्षेत्रीय संबंधों में नई दिशा देखने को मिल सकती है।
🧠 आगे की चुनौतियाँ: हालांकि जीत ऐतिहासिक है, लेकिन चुनौतियाँ भी कम नहीं हैं: आर्थिक स्थिरता बहाल करना, राजनीतिक ध्रुवीकरण कम करना, प्रशासनिक सुधार लागू करना और अंतरराष्ट्रीय भरोसा मजबूत करना, अब पूरी दुनिया की नजर इस बात पर है कि तारिक रहमान अपने वादों को किस तरह जमीन पर उतारते हैं।






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