ढाका | 13 फ़रवरी 2026। नेशनल पॉजिटिव न्यूज़ डेस्क
गुरुवार को हुए बांग्लादेश के आम चुनाव में Bangladesh Nationalist Party (BNP) ने ऐतिहासिक जीत दर्ज करते हुए स्पष्ट बहुमत हासिल कर लिया है। प्रतिष्ठित बांग्लादेशी अखबार Prothom Alo के मुताबिक, BNP और उसके सहयोगी दलों ने 299 सीटों में से 212 सीटें जीत ली हैं। बहुमत के लिए आवश्यक 150 सीटों के आंकड़े को पार करते हुए पार्टी सरकार बनाने की स्थिति में आ गई है। अब तक 297 सीटों के परिणाम घोषित हो चुके हैं और रुझानों से स्पष्ट है कि देश में करीब 20 साल बाद सत्ता परिवर्तन हो रहा है।
📊 मुख्य चुनाव परिणाम: इस चुनाव में BNP ने प्रचंड बहुमत हासिल किया। 👉 BNP+गठबंधन: 212 सीटें 👉 Jamaat-e-Islami के नेतृत्व वाले 11 दलों का गठबंधन: 77 सीटें। अन्य दलों का प्रदर्शन बेहद कमजोर रहा। 2008 से 2024 तक देश में Sheikh Hasina के नेतृत्व में Awami League सत्ता में रही थी। इस बार अवामी लीग चुनावी परिदृश्य में प्रभावी भूमिका में नहीं रही, जिसका सीधा लाभ BNP को मिला।
👤 तारिक रहमान की दोहरी जीत, PM बनना तय: BNP अध्यक्ष तारीक रहमान ने दो सीटों — ढाका-17 और बोगुरा-6 — से चुनाव लड़ा और दोनों पर जीत दर्ज की।राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, उनकी जीत के साथ उनका प्रधानमंत्री बनना लगभग तय है। उल्लेखनीय है कि बांग्लादेश में 35 साल बाद कोई पुरुष प्रधानमंत्री बनेगा।1988 में Kazi Zafar Ahmed प्रधानमंत्री बने थे। इसके बाद 1991 से 2024 तक देश की राजनीति में शेख हसीना और खलीदा ज़िआ का दबदबा रहा।
🌍 अंतरराष्ट्रीय प्रतिक्रिया: तारिक रहमान की जीत पर पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने उन्हें बधाई दी। उन्होंने कहा, “मेरे भाई तारिक, उनकी टीम और सभी सहयोगियों को बधाई।” इसके अलावा कई अंतरराष्ट्रीय नेताओं ने भी लोकतांत्रिक प्रक्रिया की सराहना की है।
🗳️ जमात और NCP को झटका: चुनाव में कट्टरपंथी मानी जाने वाली जमात-ए-इस्लामी का प्रदर्शन उम्मीद से कमजोर रहा। वहीं, शेख हसीना सरकार के खिलाफ आंदोलन से उभरी National Citizen Party (NCP) को भी मतदाताओं ने नकार दिया। विशेषज्ञों के अनुसार, जमात के साथ गठबंधन और आंतरिक फूट NCP के लिए भारी पड़ी।
🔍 BNP की एकतरफा जीत की तीन बड़ी वजहें: विशेषज्ञ इस प्रचंड जीत के पीछे तीन प्रमुख कारण बताते हैं:1️⃣ अवामी लीग के वोटों का शिफ्ट होना, अवामी लीग के पारंपरिक गढ़ गोपालगंज समेत खुलना, सिलहट, चटगांव और ठाकुरगंज जैसे इलाकों में BNP को बढ़त मिली। खासकर हिंदू मतदाताओं का झुकाव BNP की ओर देखा गया। 2️⃣ जमात का ऐतिहासिक विवाद: मुक्ति संग्राम के दौरान भूमिका को लेकर जमात की छवि पर लगा दाग अब भी असर डालता दिखा। 3️⃣ NCP की रणनीतिक गलती: छात्र आंदोलन से निकली पार्टी का जमात से गठबंधन और आंतरिक मतभेद मतदाताओं को रास नहीं आए।
📈 मतदान और जनमत संग्रह: चुनाव शांतिपूर्ण माहौल में संपन्न हुआ। लगभग 59–60% मतदान दर्ज किया गया।इसके साथ एक संवैधानिक सुधार संबंधी जनमत संग्रह (Referendum) भी आयोजित किया गया, जिसमें शासन व्यवस्था में बदलाव के प्रस्तावों को प्रारंभिक समर्थन मिलने की खबर है।






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